Wednesday, December 12, 2012

घनघोर तरक्की

महंगाई की बन गई है सिरमोर तरक्की
क्या खूब हुई देश की घनघोर तरक्की

शातिरों ने पैसे को पावर में जो बदला
क्या हो गई है और सीनाजोर तरक्की

आगे जो बढ़ना है तो फिर दाम चुकाओ
जाने कहां ले जाएगी घुसखोर तरक्की

घर गया, जमीन गई, गांव भी गया
सुख चैन तक तो ले उड़ी ये चोर तरक्की

कुछ हुए अमीर, कई हो गए कंगाल
कितनों को भरमाये है चितचोर तरक्की

अफसर अगर चाटेंगे चापलूसी की चटनी
पा जाएंगे जल्दी ही चुगलखोर तरक्की

कुछ लोग है विकास की ही चाशनी में तर
गंावों के किनारे खड़ी कमजोर तरक्की

न जाने कभी आएगा क्या ऐसा जमाना
उस ओर तरक्की हो तो इस ओर तरक्की

2 comments:

  1. कुछ लोग है विकास की ही चाशनी में तर
    गांवों के किनारे खड़ी कमजोर तरक्की
    न जाने कभी आएगा क्या ऐसा जमाना
    उस ओर तरक्की हो तो इस ओर तरक्की
    तरक्की की यही तो असलियत है..
    कुछ लोग आमिर बन गए कई लोग करीब..
    हकीकत बयां करती रचना..
    आपकी रचनाओ में सामाजिक पहलू
    बहुत ही सूक्ष्म तरीके से दिखाई देती है...

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  2. This comment has been removed by the author.

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